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निमाड़ में डोल ग्यारस 2026: खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी में आस्था और लोकसंस्कृति का पर्व

खरगोन। निमाड़ अंचल में डोल ग्यारस 2026 आज 22 सितंबर को धार्मिक आस्था और पारंपरिक लोक संस्कृति के साथ मनाई जा रही है। खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी सहित निमाड़ के अलग-अलग क्षेत्रों में यह पर्व भगवान विष्णु की आराधना, मंदिर परंपराओं और सामूहिक धार्मिक आयोजनों से जुड़ा हुआ है। निमाड़ में डोल ग्यारस को केवल एक धार्मिक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय लोकजीवन और सामाजिक सहभागिता से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जाता है।

क्या है डोल ग्यारस?

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डोल ग्यारस को जलझूलनी एकादशी और परिवर्तिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। धार्मिक परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

कई क्षेत्रों में भगवान की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाकर डोल या पालकी में विराजित किया जाता है और धार्मिक शोभायात्रा निकाली जाती है। जलस्थल तक भगवान को ले जाने की परंपरा के कारण इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहा जाता है।

निमाड़ में क्यों खास है डोल ग्यारस?

निमाड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में मंदिरों और सामूहिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डोल ग्यारस के अवसर पर भी कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष श्रृंगार, पूजा, भजन-कीर्तन और डोल यात्रा जैसे आयोजन होते हैं।

खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी के ग्रामीण तथा कस्बाई क्षेत्रों में इस पर्व की स्थानीय परंपराएं अलग-अलग रूपों में दिखाई देती हैं। कहीं भगवान की डोल यात्रा प्रमुख आकर्षण होती है तो कहीं मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है।

यही वजह है कि निमाड़ में डोल ग्यारस का संबंध केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि लोक परंपरा, सामुदायिक सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत से भी है।

डोल में विराजते हैं भगवान, उमड़ती है श्रद्धा

डोल ग्यारस के अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद कई स्थानों पर भगवान की प्रतिमा को डोल अथवा पालकी में विराजित कर श्रद्धालु धार्मिक यात्रा में शामिल होते हैं।

भजन-कीर्तन, जयकारों और पारंपरिक धार्मिक वातावरण के बीच निकलने वाली यह यात्रा ग्रामीण और कस्बाई जीवन में विशेष उत्साह पैदा करती है। परिवारों के साथ लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं और मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।

निमाड़ी संस्कृति में डोल ग्यारस की पहचान

निमाड़ की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में लोकभाषा, लोकगीत, धार्मिक परंपराएं और सामूहिक उत्सव शामिल हैं। डोल ग्यारस भी इसी सांस्कृतिक निरंतरता का हिस्सा है।

इस पर्व के दौरान धार्मिक आयोजन स्थानीय वातावरण और निमाड़ी लोकजीवन से जुड़ जाते हैं। बुजुर्गों से मिली परंपराएं युवा पीढ़ी तक पहुंचती हैं और इस तरह धार्मिक पर्व के साथ स्थानीय सांस्कृतिक पहचान भी बनी रहती है।

खरगोन से बड़वानी तक धार्मिक उत्साह

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निमाड़ क्षेत्र को सामान्यतः खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी के व्यापक सांस्कृतिक क्षेत्र से जोड़ा जाता है। इन जिलों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और उत्सवों का अपना अलग स्वरूप है।

खरगोन में डोल ग्यारस के अवसर पर स्थानीय स्तर पर धार्मिक आयोजन होते हैं, वहीं खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी के विभिन्न क्षेत्रों में भी श्रद्धालु अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार पर्व मनाते हैं।

डोल ग्यारस का यही स्थानीय स्वरूप निमाड़ की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाता है।

आज 22 सितंबर 2026 को डोल ग्यारस

वर्ष 2026 में डोल ग्यारस 22 सितंबर को मनाई जा रही है। खरगोन जिले के आधिकारिक अवकाश आदेश में भी 22 सितंबर को डोल ग्यारस के अवसर पर स्थानीय अवकाश दर्ज किया गया है।

इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। मंदिरों में विशेष धार्मिक गतिविधियों के साथ कई स्थानों पर डोल यात्रा और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

डोल ग्यारस केवल पर्व नहीं, निमाड़ की सांस्कृतिक स्मृति

निमाड़ में डोल ग्यारस का महत्व इस बात में भी है कि यह पर्व धर्म और लोकसंस्कृति को एक साथ जोड़ता है। मंदिर से निकलने वाली डोल यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहती, बल्कि इसमें गांव और समाज की सामूहिक भागीदारी दिखाई देती है।

बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बावजूद ऐसी परंपराएं निमाड़ की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डोल ग्यारस इसी परंपरा की एक ऐसी कड़ी है, जिसमें आस्था के साथ निमाड़ी समाज की सामूहिकता और लोकजीवन की झलक दिखाई देती है।

निमाड़ में डोल ग्यारस 2026 इसलिए भी खास है क्योंकि यह पर्व भगवान की आराधना के साथ खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी की स्थानीय धार्मिक परंपराओं तथा निमाड़ी लोक संस्कृति को एक साथ जोड़ता है।

 

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