धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी
विश्व पर्यटन दिवस केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्शन है जो हमें याद दिलाता है कि पर्यटन समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला जीवंत सेतु है। प्रतिवर्ष 27 सितंबर को मनाया जाने वाला यह वैश्विक उत्सव संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) की उस प्रेरणा का हिस्सा है, जो 1980 से जिम्मेदार, सुलभ और सतत पर्यटन को आगे बढ़ाने का साझा मंच देता आया है। यह हमें यह सुनिश्चित करने का आह्वान करता है कि विकास की रफ्तार प्रकृति, संस्कृति और समुदायों की कीमत पर नहीं, बल्कि सामंजस्य और सह-अस्तित्व पर केंद्रित रहे।
पर्यटन का असली अर्थ है—स्थानीय लोगों का विकास और स्थानीयता का उत्थान। हमारे ग्रामीण पर्यटन मॉडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” आह्वान को धरातल पर उतारा है। “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान ने स्थानीय शिल्प, कला, व्यंजन और परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने की राह खोली है। “देखो अपना देश” अभियान ने देशवासियों में अपने ही देश की विविधता को देखने-समझने की अभिरुचि जगाकर अंतर-देशीय पर्यटन को नई ऊर्जा प्रदान की है। यह दृष्टि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को पर्यटन की धुरी बनाती है—ताकि पर्यटन केवल राजस्व का स्रोत न रहकर सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का मजबूत स्तंभ बने।
अद्भुत विरासत से समृद्ध मध्यप्रदेश गर्व से कह सकता है कि वह भारत के बहुमूल्य धरोहरो का धनी संरक्षक है। प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र का इसमें बहुमूल्य योगदान है। निमाड़ अंचल पर्यटन में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां बहती मां नर्मदा की शांत धारा, प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक किले और लोक संस्कृति की अनूठी छटा पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। निमाड़ की धरती पर कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है जैसे प्रकृति और परंपरा एक साथ आपका स्वागत कर रही हों। नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर स्थित ओंकारेश्वर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। खंडवा जिले का हनुवंतिया टापू अब निमाड़ के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो चुका है। यहां जल पर्यटन के साथ-साथ कई रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। बुरहानपुर का खूनी भंडारा इतिहास को सहेजने का प्रयास है।
निमाड़ का महेश्वर पर्यटन के नक्शे पर एक खास स्थान रखता है। नर्मदा किनारे बसा यह ऐतिहासिक नगर देवी अहिल्याबाई होल्कर की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है। यहां का किला, सुंदर घाट और शाम की नर्मदा आरती पर्यटकों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है। महेश्वर की प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियां यहां की कला और हुनर की पहचान हैं। हमारी सांस्कृतिक, धार्मिक पहचान के रूप में बनने वाला आदि शंकराचार्य लोक , दादाजी धूनीवाले ,संत सिंगाजी धाम पर्यटकों के लिए विशेष है। आदिवासी परंपरा में भगोरिया पर्व , काठी नृत्य आदि के बिना निमाड़ की संस्कृति पर्यटन अधूरा है।
आगामी 7 से 10 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित होने वाला मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट राज्य निमाड़ पर्यटन को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन बाजार में भी वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा। इस मार्ट का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों तथा विदेशी खरीदारों को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों से सीधे जोड़ना है। इसमें निमाड़ के महेश्वर को भी शामिल किया गया है।
हम कह सकते है कि ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 ‘ निमाड़ को वैश्विक पर्यटन बाजार में अग्रणी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा, जो आने वाले वर्षों के लिए पर्यटन विकास की नींव को और भी मजबूत करेगा।
लेखक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ,पर्यटन ,संस्कृति,धार्मिक न्यास और धर्मस्व है।
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