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ओंकारेश्वर गया शिला तीर्थ का महत्व, सर्वपितृ अमावस्या पर पिंडदान

खंडवा। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग तीर्थ ओंकारेश्वर में शनिवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां नर्मदा में स्नान कर पितरों की शांति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करेंगे। साथ ही भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे।

गया शिला तीर्थ में पिंडदान की विशेष मान्यता

ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में नर्मदा नदी के उत्तर तट पर कावेरी नदी के उत्तरी किनारे स्थित प्राचीन गया शिला तीर्थ पितृ कर्म के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पिंडदान और श्राद्ध-तर्पण करने का महत्व बिहार के गयाजी के समान माना जाता है। इसी मान्यता के चलते पितृ पक्ष और अमावस्या के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

पद्म पुराण में मिलता है गया शिला का उल्लेख

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया शिला तीर्थ का संबंध प्राचीन पुराणों में वर्णित ओंकार तीर्थ की महिमा से है। मान्यता है कि दुर्वासा ऋषि ने ओंकार तीर्थ में भगवान शिव की आराधना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ओंकार ने इस तीर्थ को गया के समान महत्व प्राप्त होने का वरदान दिया। इसके बाद यहां गया जी की तरह पितरों के निमित्त पिंडदान करने की परंपरा प्रचलित हुई।

धार्मिक परंपराओं में ओंकारेश्वर के गया शिला स्थान पर पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध-तर्पण का विशेष उल्लेख मिलता है। नर्मदा पुराण के अध्याय 111 में भी ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों के साथ गया शिला का उल्लेख किए जाने की बात कही जाती है।

अमावस्या पर भी होते हैं पितृ कर्म

गया शिला तीर्थ में पितृ पक्ष के अलावा प्रत्येक महीने चतुर्दशी और उसके अगले दिन अमावस्या पर भी पितरों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु यहां विधि-विधान से पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पितृ कर्म कराने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या को पितृ पक्ष का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त किए गए श्राद्ध और तर्पण से पूर्वजों के प्रति कर्तव्य निभाने का विशेष धार्मिक फल प्राप्त होता है।

नर्मदा स्नान और ज्योतिर्लिंग दर्शन का भी महत्व

ओंकारेश्वर में सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर श्रद्धालुओं के लिए नर्मदा स्नान, गया शिला में पितृ कर्म और ज्योतिर्लिंग दर्शन प्रमुख धार्मिक गतिविधियां रहेंगी। नर्मदा तट पर स्थित यह तीर्थ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भगवान शिव की आराधना भी की जाती है।

इस अवसर पर ओंकारेश्वर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील है कि वे स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के निर्देशों का पालन करें तथा स्नान और पूजा के दौरान निर्धारित सुरक्षा व्यवस्थाओं का ध्यान रखें।