भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) में मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार को याद किया गया। विश्वविद्यालय के सिनेमा तथा विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने किशोर दा के जीवन, संघर्ष, कला और अपनी जन्मभूमि खंडवा से उनके गहरे जुड़ाव पर विचार साझा किए।
विनय उपाध्याय ने कहा कि किशोर कुमार बहुआयामी प्रतिभा के धनी कलाकार थे। गायकी, अभिनय, लेखन और निर्देशन सहित फिल्म निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। सिनेमा की दुनिया में ऊंचाइयां हासिल करने के बावजूद वे अपनी जन्मभूमि खंडवा और वहां के मित्रों से हमेशा जुड़े रहे। उनकी स्मृतियों में खंडवा का विशेष स्थान था और आज भी उनके प्रशंसक उन्हें अपने करीब महसूस करते हैं।
खंडवा की मिट्टी से हमेशा जुड़ा रहा किशोर दा का रिश्ता
विनय उपाध्याय ने कहा कि खंडवा की धरती का भारतीय कला, साहित्य और संगीत की दुनिया में विशेष योगदान रहा है। इसी शहर से अमर स्वतंत्रता सेनानी एवं साहित्यकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी और संत सिंगा जी जैसी विभूतियों का जुड़ाव रहा, वहीं किशोर कुमार ने अपनी प्रतिभा से देश-दुनिया में पहचान बनाई।
उन्होंने किशोर कुमार के मुंबई जाने से लेकर फिल्म जगत में सफलता हासिल करने तक के अनेक प्रसंग सुनाए। उन्होंने बताया कि किशोर दा जब भी खंडवा आते थे, अपने करीबी मित्रों के साथ समय बिताते और उन्हें अपने गीतों तथा फिल्मों से जुड़े रोचक किस्से सुनाते थे।
गौरीकुंज और स्मारक में जीवंत हैं किशोर दा की यादें
कार्यक्रम में किशोर कुमार के खंडवा से जुड़े संस्मरणों का उल्लेख करते हुए विनय उपाध्याय ने बताया कि शहर में उनके माता-पिता की स्मृति से जुड़ा गौरीकुंज सभागृह और किशोर कुमार का स्मारक उनकी यादों को जीवंत बनाए हुए हैं। यहां उनके प्रशंसक पहुंचते हैं और उनके गीतों तथा फिल्मों के माध्यम से उनकी कला को याद करते हैं।
उन्होंने किशोर कुमार की स्कूली शिक्षा, मुंबई की यात्रा और गायकी की दुनिया में उनकी सफलता से जुड़े कई रोचक प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि किशोर दा ने अपनी गायकी में योडलिंग का अनूठा प्रयोग किया और अपनी अलग शैली से संगीत जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। इस दौरान उनकी फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ से जुड़ा किस्सा भी सुनाया गया। उन्होंने किशोर कुमार को बेहद कल्पनाशील व्यक्तित्व का धनी बताया।
कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने भी किया याद
विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में किशोर कुमार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि संगीत की औपचारिक शिक्षा के बिना भी किशोर कुमार ने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर गायकी में ऊंचा मुकाम हासिल किया। उनकी गायकी और अभिनय आज भी अमर हैं।
उन्होंने किशोर कुमार के गीतों और ‘आंधी’ तथा ‘दाग’ जैसी फिल्मों से जुड़े संगीत का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने विषय की भूमिका प्रस्तुत की और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन विभाग की डॉ. विशाखा राजुरकर ने किया।
किशोर कुमार की कला, उनके संघर्ष और खंडवा से उनके भावनात्मक जुड़ाव पर केंद्रित इस संवाद ने विद्यार्थियों को भारतीय सिनेमा की एक ऐसी शख्सियत से परिचित कराया, जिनकी आवाज और अभिनय आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं।
